एक स्कूल टीचर कीरत राय गुप्ता ने हैवेल्स जैसी विशाल कंपनी कैसे खड़ी कर दी?

दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के प्राथमिक टीचर से रिटायर होकर किंमत राय गुप्ता ने अपने आप को व्यस्त रखने के लिए एक दुकान खोल कर अपने आप को व्यस्त रखने का फैसला किया |1 min


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दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के प्राथमिक टीचर से रिटायर होकर किंमत राय गुप्ता ने अपने आप को व्यस्त रखने के लिए एक दुकान खोल कर अपने आप को व्यस्त रखने का फैसला किया… क्योंकि उस जमाने में बिजली के उपकरणों की बहुत मांग थी तो तीरथ राय गुप्ता ने दिल्ली के भगीरथ पैलेस मार्केट में बिजली के उपकरणों का दुकान खोला।

एक दिन उनके दुकान पर एक सेल्समैन आया और बातों बातों में पता चला एक छोटी सी यूनिट जिसका ब्रांड नेम हैवेल्स है और जिसके मालिक हवेली राम गांधी हैं वह अपनी फैक्ट्री और अपना कारोबार बेचना चाहते हैं।

हवेली राम गांधी से 7 लाख में खरीदी थी हैवेल्स, आज बनीं 10 हजार करोड़ से ज्यादा की कंपनी

किंमत राय गुप्ता के पास कुछ पैसे थे और कुछ पैसे उन्होंने बैंक से लोन लेकर उस जमाने में यानी 1959 में हैवेल्स को हवेली राम गांधी से 7 लाख रुपये में खरीद लिया उसके बाद वह हैवेल्स ब्रांड नेम को कैसे लोकप्रिय बनाया जाए उस पर ध्यान देते रहे। और अपनी लगन और प्रतिभा से हैवेल्स को भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक स्थापित ब्रांड बना दिया।

किंमत राय गुप्ता की मौत साल 2014 में हो गई। उनके बाद कंपनी की बागडोर बेटे अनिल रायगुप्ता को मिली।

हैवेल्स को हवेली राम गांधी से खरीदने के बाद कीरत राय गुप्ता ने 1976 में दिल्ली के कीर्ति नगर में एक पहला स्विच बनाने का प्लांट लगाया और धीरे-धीरे उन्होंने काफी तरक्की कर लिया और अपने प्लांट तथा अपने बिजनेस का विस्तार करते रहे।

शुरू से ही हैवेल्स ने अधिग्रहण की नीति पर काम किया। यानी कि ऐसे यूनिट, ऐसी कंपनी या ऐसे प्लांट को खरीदा जाए जो घाटे में चल रही हो.. इस तरह कीरत राय गुप्ता ने घाटे में चल रही बहुत सी इकाइयों का अधिग्रहण किया और अपनी मेहनत के दम पर उन्हें फायदे ला दिया।

1983 में कीरत राय गुप्ता ने मीटर, ट्रांसफार्मर, वायर बनाने वाली कई कंपनियों का अधिग्रहण किया।

1993 में हैवेल्स कंपनी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हो गई। अलवर की सूर्या केबल की घाटे वाली केबल और वायर कैटेगरी को खरीदकर मुनाफे में बदल दिया। साल 2000 में कंपनी ने यूके की Crabtree के साथ होम ऑटोमेशन के लिए ज्वाइंट वेंचर बनाया और इसी साल कंपनी भारत की दूसरी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक स्विचगियर कंपनी बन गई।

1600 करोड़ रुपए में Lloyd के कंज्यूमर ड्यूरेबल बिजनेस का किया अधिग्रहण

कंपनी ने साल 2003 में फैन, सीएफएल और लाइटिंग के कारोबार में कदम रखा। साल 2006 में पैरेंट कंपनी Crabtree की भारतीय इकाई को खरीद लिया। कंपनी साल 2010 में वाटर हीटर के कारोबार में उतरने के बाद घरेलू स्तर पर मिक्सर, आयरन और हैंड ब्लेंडर बनाने का काम शुरू किया। इसके बाद साल 2017 में Lloyd कंज्यूमर डुरेबल बिजनेस को 1600 करोड़ रुपए में खरीदा।

कंपनी की कमाई और रेवेन्यू

हैवेल्स कंपनी का मौजूदा वक्त में पैन इंडिया डीलर नेटवर्क है। इसमें 11 हजार डिस्ट्रीब्यूटर और 6,500 कर्मचारी हैं। साल 2019 के चालू वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 10,057 करोड़ रुपए रहा, जो कि पिछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत ज्यादा था। वहीं मुनाफा 11 फीसदी बढ़कर 791 करोड़ रुपए हो गया।

अपने निधन के कुछ साल पहले कीरत राय गुप्ता ने एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था कि यदि व्यक्ति के अंदर मेहनत, लगन और रिस्क उठाने का साहस हो तो वह सफलता के झंडे गाड़ सकता है ।

यदि कोई कंपनी घाटे में चल रही है तो उसे मात्र कुछ पॉलिसी चेंज करके फायदे में लाया जा सकता है और इसी फिलासफी पर काम करते हुए भगीरथ पैलेस की एक छोटी सी दुकान से शुरुआत करते कीरत राय गुप्ता ने हैवेल्स जैसा ब्रांड नेम बना दिया जो आज हजारों करोड़ की स्थापित कंपनी बन गई है |

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